ईश्वरनिहित ऐश्वर्य की कामना करें: गुरुपद संभव राम


वाराणसी(काशीवाार्त)। अधिकांश तो यही देखने में आता है कि हमलोग अपने समय को बहुत बर्बाद कर देते हैं। हम जिस चीज के लिए यहाँ आते हैं या गोष्ठियों में सुनते-सुनाते हैं, वह हममें परिलक्षित नहीं होती। अनर्गल बातचीत में ही या अपने परिवार में या अपने काम धंधे में ही हम सीमित रह जाते हैं, परिणामस्वरुप सभी असंतुष्ट और अस्वस्थ हैं। यहाँ आकर हमलोग अवश्य ही कुछ सोचें-समझें और कम से कम अपने घर-परिवार में ही स्वर्ग का वातावरण बनायें। यह बातें अघोरश्वर भगवान राम के 30वें महानिर्वाण दिवस पर श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष गुरूपद संभव राम ने पड़ाव स्थित अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पर अपने आशीर्वचन में कही। उन्होंने कहा कि अपने अभ्यंतर में भी कचड़ा बटोरे हुए हैं और अपने साथी-मित्र और परिजनों को भी प्रताड़ित करते हैं तथा अपने समाज और राष्ट्र के विपरीत भी कई चीजें करने को तैयार हो जाते हैं। इस कोरोना में ही देखें तो बहुत धन-संपत्ति रहने के बाद कई लोगों की जान नहीं बच पाई। जिस सुख-शांति को हम मृग-मरीचिका की भांति ढूढ़ रहे हैं वह अगर मिल भी जाय तो भी हो सकता है कि उसको हम संभाल न पायें और अनेकों दुर्व्यसनों में संलिप्त होकर अपने-आपको बर्बाद कर लें। उन्होंने कहा कि हमारा अहंकार परवान चढ़ जाता है। धन-संपत्ति या अधिकार का दुरुपयोग हमें अनेक परेशानियों में डाल देता है। हम जिस ऐश्वर्य के पीछे भाग रहे हैं वह यदि ईश्वरनिहित ऐश्वर्य नहीं हुआ तो दुखदाई होता है। अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपको ध्यान-धारणा, योग, शुद्ध खान-पान, रहन-सहन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। गुरूपद ने कहा कि आज बहुत से लोग मानसिक रूप से विकृत हो रहे हैं। घरों में बैठे-बैठे या काम-धंधे के बंद होने से अथार्भाव में उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जा रहा है। महापुरुषों की वाणियों का संबल तथा ईश्वर निहित ऐश्वर्य की कामना ही इससे छुटकारा दिला सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की लोग बहुत बड़ाई करते हैं लेकिन इसी की देन है कि किसी भी चीज पर शासन-प्रशासन कड़ाई नहीं कर पाता। लोकतंत्र अच्छा तो है लेकिन इसी की आड़ में अनेक तरह के दुष्कृत्य समाज में हो रहे हैं। प्रदूषण, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, मिलावटखोरी जैसे अनेक समस्याओं पर लगाम कसना बहुत जरुरी है। हाँ, एक बात जरूर है कि हमारी संस्था के अधिकांश लोग जहाँ भी रहते हैं, बहुत ही संयमित जीवन जीते हैं। उनका आचरण-व्यवहार, उनकी वाणी औरों से अलग ही होती है। लोग खुद ही आश्चर्य से पूछते हैं कि आपलोग कैसे इतने शांत और प्रसन्न रहते हैं। हमलोगों को अपने जीवन को सुन्दर, सुखमय बनाने के लिए महापुरुषों की वाणियों का अनुसरण, अपने साहित्य का अध्ययन, चिंतन और मनन करना चाहिए, नहीं तो हमारा यह छोटा सा जीवन व्यर्थ चला जायेगा और अंत में पछतावा ही हाथ लगेगा। अपने भटकाव को हमें स्वयं ही दूर करना होगा, कोई दूसरा हमारे लिए नहीं करेगा। हम सभी को वह ईश्वर सदबुद्धि दें।
गोष्ठी के अन्य वक्ताओं में पड़ाव आश्रम स्थित अघोर शोध संस्थान के निदेशक डॉ० अशोक कुमार, भोपाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ० शिवशंकर सिंह, अवधेश सिंह, (पुलिस अधीक्षक, रेलवे गोरखपुर) तथा जौनपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता के०डी० सिंह थे। मंगलाचरण यशवंत नाथ शाहदेव ने किया और गोष्ठी का सञ्चालन डॉ. बामदेव पाण्डेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्था के प्रचार मंत्री पारस नाथ यादव ने किया।