महाराष्ट के बाद गाजीपुर में भाजपा का मिशन लोटस


(अजीत सिंह)
गाजीपुर (काशीवार्ता)। महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार गिराने वाली भाजपा ने अब मिशन लोटस का प्रयोग ब्लाकों में करना शुरू कर दिया है। जमानियां एवं भदौरा के समाजवादी ब्लाक प्रमुखों को कुर्सी से हटाने के लिए क्षेत्र पंचायत सदस्य कभी भी डीएम को अपना हस्ताक्षर युक्त पत्रक दे सकते हैं। इन ब्लाकों में दोबारा चुनाव होंगे तो कमल खिलना तय माना जा है। क्योंकि भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल ने इसकी पूरी तैयारी जमानियां में कर ली है। दोनों ब्लाक प्रमुखों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की पुष्टि भी हो चुकी है। इनका जेल जाना भी तय है। अब देखना होगा कि सपा विधायक ओमप्रकाश सिंह मिशन लोटस को रोकने में सफल होते हैं या फिर चंचल के वर्चस्व के चलते इन ब्लाकों में भाजपा के चेहरे ब्लाक प्रमुख पद पर बैठेंगे।पिछले वर्ष 10 जुलाई को यहां पर मनीष कुशवाहा ने ब्लाक प्रमुख पद की शपथ ली थीं, भाजपा समर्थित उम्मीदवार चुनाव हार गई थी। सदस्यों का आरोप रहा कि प्रमुख बनने के बाद विकास के नाम पर ब्लाक को लूटा गया, यही नहीं सरकारी धन में बंदरबांट भी हुई। हालात यह हो गए कि जब जांच हुई तो बड़ा घपला निकला। इस मामले में इनकी गर्दन फंस चुकी है। साथ ही शासन से एक और जांच चल रही है। सभी प्रकार के भुगतान पर डीएम ने रोक लगा दी है। इधर चंचल ने जमानियां में चंदन तिवारी की पत्नी को ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर बैठाने के लिए एक एक बीडीसी सदस्यों से बात भी कर ली है। उनका कई बार जमानियां का दौरा भी जग जाहिर हो चुका है। बीडीसी सदस्य भी बदलाव की बयार में डूबे हुए हैं। किसी भी दिन बीडीसी सदस्य डीएम से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा करके खलबली मचा सकते हैं। इसके अलावा भदौरा की सपा ब्लाक प्रमुख पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यहां भी खुलेआम सरकारी धन में लूटपाट की गई है। सरकारी धन में बंदरबांट करने वालों पर डीएम की कड़ी नजर है। बीडीसी सदस्यों ने मांग किया है कि यहां भी अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए, ताकि भ्रष्ट लोगों को कुर्सी से हटाया जा सके। इन दोनों ब्लाक प्रमुखों को कुर्सी तक पहुंचाने में पूर्व मंत्री एवं जमानियां विधायक ओपी सिंह ने बड़ी भूमिका अदा की थी। अब सवाल उठता है कि क्या ओपी इनकी कुर्सी बचाने के लिए आगे आएंगे, या फिर चंचल की ताकत के आगे नतमस्तक हो जाएंगे। क्योंकि मौजूदा समय में भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल से सियासी रूप से लड़ने में कोई भी सियासतदां सक्षम दिखाई नहीं दे रहा है। इसको लेकर दोनों ब्लाकों में खलबली मची हुई है।