पार्कों के माली कर रहे बंगलों की रखवाली


वाराणसी (काशीवार्ता)। केन्द्र व प्रदेश सरकारें निरन्तर सभी विभागों को यह निर्देश जारी कर रही है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करें और हरियाली को बढ़ावा दें, लेकिन जिम्मेदार विभागों को शायद इसकी कोई परवाह नहीं है। तभी तो जिन मालियों को पार्कों की देखरेख के लिए रखा गया था, वे माननीयों और उच्च अधिकारियों के बंगलों की साफ-सफाई व्यवस्था और रखवाली में मशगूल हैं। लिहाजा, शहर के अधिकतर पार्क उजाड़ और वीरान हो गए हैं।
गौरतलब है कि शहर के पार्कों के रखरखाव के लिए निगम के उद्यान विभाग में दो तरह के माली कार्यरत हैं। पहला वे माली जो सीधी भर्ती से आये हैं, उनकी संख्या 42 है। चूंकि शासन से सीधी भर्ती पर रोक लगी है, तो विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग पर 45 कर्मचारियों की भर्ती ठेकेदारों के माध्यम से की गई है। जिन पार्कों में माली नहीं है वहां इन्हें लगातार पर्यावरण संरक्षण का कार्य कराया जाता है। इस तरह कुल मिलाकर मालियों की संख्या 87 है। अब आइये जाने की शहर में पार्कों की संख्या कितनी है। शहर में 175 पार्क हैं, जिनमें यदि 15 आवास-विकास के पार्कों को भी जोड़ा जाये तो कुल संख्या 190 होती है। निगम के उद्यान विभाग द्वारा मालियों की नए सिरे से तैनाती की गई है। इसके पीछे अधिकारियों की मंशा यह थी कि घर बैठे जो माली वेतन ले रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर काम पर लगाया जाये। इसके लिए नए सिरे से पांच जोन में माली नियुक्त किये गये। आदमपुर कोतवाली के लिए 19, भेलूपुर में 11, दशाश्वमेध में 17, वरुणापार में 13 कर्मचारी लगाये गये। इनके ऊपर एक हेडमाली नियुक्त किया गया, जिनके हस्ताक्षर के बाद ही इनका वेतन निर्गत होगा। अब इन मालियों की कुल बची हुई संख्या इतनी नहीं कि पूरे शहर के पार्कों को हरा-भरा रखा जाए।
सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर माली अधिकारियों के बंगलों पर काम कर रहे हैं। प्रश्न यह उठता है कि बरसात आ रही है। इस समय पार्कों में वृहद पौधरोपण का कार्यक्रम शासन ने तय कर रखा है। पौधरोपण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि पेड़ लगाने के बाद उनकी सुरक्षा भी की जाये, अन्यथा पेड़ सूख जाते हैं। अब जबकि पहले से ही मालियों की संख्या कम है तो शासन की मंशा कैसे पूरी हो सकती है।